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॥ ॐ गुरु निरंजन देवाय नमः ॥

पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी

आदि शंकराचार्य की महान दशनामी परंपरा से प्रेरित, पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी सदियों से सनातन धर्म की रक्षा, आध्यात्मिक चेतना के प्रसार, संत परंपरा के संरक्षण तथा मानव कल्याण के लिए समर्पित है।

सदियों की आध्यात्मिक परंपरा

स्वयंसेवकों का विशाल समूह

सनातन धर्म सेवा एवं संरक्षण

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हमारी कहानी, आस्था, मिशन और विजन

पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी

पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी , महान दार्शनिक एवं धर्मप्रवर्तक आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित दशनामी संप्रदाय की एक अत्यंत प्राचीन, तेजस्वी और प्रतिष्ठित शाखा है। इस अखाड़े की स्थापना विक्रम संवत १४२९ (ईस्वी १४७२) में हुई थी।

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गुरु परंपरा

आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित दशनामी संन्यास परंपरा का संरक्षण एवं संवर्धन।

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धर्म एवं समाज सेवा

सनातन धर्म के प्रचार, आध्यात्मिक जागरण एवं जनकल्याण के लिए निरंतर समर्पित।

॥ ॐ नमः शिवाय ॥ ॥ ॐ गुरु निरंजन देव नमः ॥ ॥ ॐ नमः शिवाय ॥ ॥ ॐ गुरु निरंजन देव नमः ॥
॥ ॐ नमः शिवाय ॥ ॥ ॐ गुरु निरंजन देव नमः ॥ ॥ ॐ नमः शिवाय ॥ ॥ ॐ गुरु निरंजन देव नमः ॥
हमारी परंपराएँ

हमारी धार्मिक परंपराएँ और अनुष्ठान

गुरु परंपरा

आदि गुरु शंकराचार्य की दशनामी परंपरा का पालन करते हुए गुरु-शिष्य परंपरा का संरक्षण एवं संवर्धन।

सनातन धर्म सेवा

सनातन धर्म के संरक्षण, आध्यात्मिक जागरण एवं समाज सेवा के लिए निरंतर समर्पित।

कुंभ एवं धार्मिक आयोजन

कुंभ मेला, शाही स्नान एवं अन्य धार्मिक आयोजनों में अखाड़े की गौरवशाली सहभागिता।

धर्म प्रचार एवं प्रचार

सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार, व्याख्यानमालाएं एवं धार्मिक शिक्षा कार्यक्रम।

हमारा उद्देश्य

श्री गुरु निरंजन देव एवं दशनामी संन्यास परंपरा

श्री गुरु निरंजन देव की पावन परंपरा में स्थापित श्री पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी, सनातन वैदिक परंपरा एवं दशनामी संन्यास परंपरा का अनुसरण करता है। इस परंपरा में गुरु-शिष्य संबंध, आध्यात्मिक साधना तथा धर्म संरक्षण को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है।

श्री १००८ श्री आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी श्री कैलाशानन्द गिरि जी महाराज

वर्तमान आचार्य गुरु

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श्री गुरु निरंजन देव स्तुति

निरंजन देव स्तुति एवं गुरु परंपरा के माध्यम से आध्यात्मिक साधना और गुरु-भक्ति का मार्ग।

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गुरु परंपरा

आदि गुरु शंकराचार्य से चली आ रही दशनामी संन्यास परंपरा एवं वर्तमान आचार्य गुरु की गौरवशाली परंपरा.

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कुंभ पर्व

हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन एवं नासिक कुंभ पर्व का आध्यात्मिक महत्व एवं अखाड़े की गौरवशाली परंपरा।

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मढ़ियाँ एवं शाखाएँ

श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े की 18 मढ़ियाँ तथा भारतभर में स्थापित आध्यात्मिक केंद्र।

प्रमुख विरासत

पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की आध्यात्मिक एवं धार्मिक धरोहर

सात अखाड़े

  • शैव संन्यासी परंपरा के सात प्रमुख अखाड़ों में श्री पंच निरंजनी अखाड़ा का विशिष्ट स्थान है।

18 मढ़ियाँ

  • देशभर में स्थापित अठारह मढ़ियाँ आध्यात्मिक साधना एवं परंपरा के प्रमुख केंद्र हैं।

चार महावाक्य

  • अहं ब्रह्मास्मि • अयमात्मा ब्रह्म • तत्त्वमसि • प्रज्ञानं ब्रह्म
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“परम पूज्य श्री 1008 श्री आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी श्री कैलाशानन्द गिरि जी महाराज”

आचार्य संदेश

परम पूज्य श्री 1008 श्री आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी श्री कैलाशानन्द गिरि जी महाराज

आचार्य गुरु का जीवन सनातन धर्म, गुरु-शिष्य परंपरा एवं आध्यात्मिक साधना के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। उनके मार्गदर्शन में श्री पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी अपनी प्राचीन परंपराओं, आध्यात्मिक मूल्यों तथा धर्म संरक्षण के संकल्प को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।

पद:

आचार्य महामण्डलेश्वर

परंपरा:

दशनामी संन्यास परंपरा

सनातन ज्ञान एवं आध्यात्मिक परंपरा

द्वादश ज्योतिर्लिंग

भगवान शिव को समर्पित बारह ज्योतिर्लिंग भारत की आध्यात्मिक चेतना के केंद्र हैं।

सप्तमोक्षदायिका पुरी

अयोध्या, मथुरा, माया, काशी, कांची, अवन्तिका एवं द्वारका का धार्मिक महत्व।

पंचकन्या

अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा एवं मन्दोदरी के स्मरण का महत्व।

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श्री महंत रविन्द्रपुरी महाराज



अध्यक्ष – पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी

अध्यक्ष – मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट, हरिद्वार

श्री महंत रविन्द्रपुरी महाराज, पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के सचिव एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट, हरिद्वार के अध्यक्ष हैं। गुरु परंपरा, सनातन धर्म के संरक्षण तथा आध्यात्मिक परंपराओं के संवर्धन में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। उनके मार्गदर्शन में अखाड़ा अपनी प्राचीन परंपराओं, धार्मिक आयोजनों एवं आध्यात्मिक मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्यरत है।

अखाड़े सात

दशनामी संन्यास परंपरा के सात प्रमुख अखाड़े

भारत की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा में, दशनामी संन्यास अखाड़े महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये अखाड़े हजारों वर्षों से सनातन धर्म के मूल्यों, दर्शनों और परंपराओं को संरक्षण और संवर्धन प्रदान कर रहे हैं।

Niranjani Akhada - Shri Niranjani Akhada | श्री निरंजनी अखाड़ा

“श्री पंच निरंजनी अखाड़ा”

दशनामी शैव संन्यास परंपरा के प्रमुख एवं प्रतिष्ठित अखाड़ों में से एक। यह अखाड़ा गुरु-शिष्य परंपरा, वैदिक ज्ञान, तप, साधना तथा सनातन धर्म के संरक्षण के लिए समर्पित है। कुंभ पर्व में इसकी विशिष्ट भूमिका एवं शाही स्नान की गौरवशाली परंपरा है।

Juna Akhada - Shri Niranjani Akhada | श्री निरंजनी अखाड़ा

“श्री पंच जूना अखाड़ा”

शैव संन्यासी परंपरा का एक प्रतिष्ठित अखाड़ा, जो साधना, गुरु-परंपरा तथा सनातन धर्म की सेवा के लिए समर्पित है। इसके संन्यासी आध्यात्मिक जीवन एवं वैदिक मूल्यों के प्रचार में सक्रिय रहते हैं।

Anand Akhada - Shri Niranjani Akhada | श्री निरंजनी अखाड़ा

“श्री पंच आनंद अखाड़ा”

आध्यात्मिक अनुशासन, वैराग्य एवं वेदांत पर आधारित दशनामी परंपरा का महत्वपूर्ण अखाड़ा। साधना, संन्यास एवं धर्म प्रचार इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं।

Avhan Akhada - Shri Niranjani Akhada | श्री निरंजनी अखाड़ा

“श्री पंच आवाहन अखाड़ा”

भगवान शिव की उपासना तथा दशनामी संन्यास परंपरा के संरक्षण के लिए समर्पित अखाड़ा। आध्यात्मिक साधना, वैदिक अध्ययन एवं धार्मिक परंपराओं के पालन में इसका विशेष स्थान है।

Atal Akhada - Shri Niranjani Akhada | श्री निरंजनी अखाड़ा

“श्री पंच अटल अखाड़ा”

दृढ़ आध्यात्मिक अनुशासन, तपस्या एवं संन्यास जीवन के आदर्शों का पालन करने वाला प्रमुख शैव अखाड़ा। यह धर्म, संस्कृति एवं वैदिक परंपराओं के संरक्षण में योगदान देता है।

Shri Nirmal Akhada - Shri Niranjani Akhada | श्री निरंजनी अखाड़ा

“श्री पंच निर्वाणी अखाड़ा”

शैव संन्यासी परंपरा का एक प्रतिष्ठित अखाड़ा, जो साधना, गुरु-परंपरा तथा सनातन धर्म की सेवा के लिए समर्पित है। इसके संन्यासी आध्यात्मिक जीवन एवं वैदिक मूल्यों के प्रचार में सक्रिय रहते हैं।

Juna Akhada - Shri Niranjani Akhada | श्री निरंजनी अखाड़ा

“श्री पंच अग्नि अखाड़ा”

वैदिक यज्ञ, तप, ब्रह्मचर्य एवं आध्यात्मिक साधना की परंपरा से जुड़ा दशनामी अखाड़ा। यह त्याग, अनुशासन एवं ज्ञान पर विशेष बल देता है।

7

शैव अखाड़े

3

वैष्णव अखाड़े

2

उदासीन अखाड़े

1

निर्मल अखाड़ा

13

कुल मान्यता प्राप्त अखाड़े

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Frequently Asked Questions

Answers to the question you might have about

1) श्री पंच निरंजनी अखाड़ा
2) श्री पंच आनंद अखाड़ा
3) श्री पंच आवाहन अखाड़ा
4) श्री पंच अटल अखाड़ा
5) श्री पंच निर्वाणी अखाड़ा
6) श्री पंच अग्नि अखाड़ा
7) श्री पंच जूना अखाड़ा.

श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े के अंतर्गत 18 मढ़ियाँ हैं।

1) अहं ब्रह्मास्मि
2) अयमात्मा ब्रह्म
3) तत्त्वमसि
4) प्रज्ञानं ब्रह्म

कुंभ पर्व चार स्थानों पर आयोजित होता है—
1) हरिद्वार
2) प्रयाग
3) उज्जैन
4) नासिक

परमहंस परिव्राजकाचार्य श्रीमद् ब्रह्मनिष्ठ पूज्यपाद श्री निरंजन पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी श्री कैलाशानन्द गिरि जी महाराज।

॥ श्री गुरु निरंजन देव स्तुति ॥

ॐकारबिन्दु संयुक्तं नित्यं ध्यायन्ति योगिनः।
कामदं मोक्षदं चैव ॐकाराय नमो नमः॥


श्री गुरु निरंजन देव स्तुति-
विशेष जानकारी

निरंजनी परंपरा की विशिष्ट आध्यात्मिक धरोहर

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दशनामी संन्यास परंपरा


आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित दशनामी संन्यास परंपरा भारतीय आध्यात्मिक जीवन, वैदिक ज्ञान एवं सन्यास धर्म की आधारशिला है।

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Juna Akhada - Shri Niranjani Akhada | श्री निरंजनी अखाड़ा

अखाड़ों का इतिहास


भारतीय संत परंपरा में अखाड़ों की स्थापना धर्म रक्षा, आध्यात्मिक साधना तथा वैदिक संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से हुई।

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गुरु–शिष्य परंपरा


गुरु से शिष्य तक ज्ञान, तप, त्याग और धर्म की परंपरा निरंतर प्रवाहित होती रही है, जो अखाड़े की मूल पहचान है।

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